

अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाले एकमात्र टेस्ट मैच के लिए जब बीसीसीआई द्वारा भारतीय टीम की घोषणा की गई तो एक बात खूब सुर्खियों में रही, और वो ऋषभ पंत को उप-कप्तान के पद से हटाना था। उनकी जगह केएल राहुल को नियुक्त किया गया, जबकि शुभमन गिल कप्तान बने रहे।
यह घोषणा आईपीएल के दौरान हुई, जब पंत लखनऊ के कप्तान और बल्लेबाज, दोनों ही भूमिकाओं में संघर्ष कर रहे थे। व्हाइट-बॉल क्रिकेट में औसत प्रदर्शन के बावजूद, पंत भारत के सबसे अहम टेस्ट क्रिकेटरों में से एक बने हुए हैं। पंत ने 49 टेस्ट मैचों में 42.91 की औसत से 3,476 रन बनाए हैं। इसके उलट, उनका वनडे औसत 33.50 है और टी20आई में यह गिरकर 23.25 हो जाता है; साथ ही, वे पिछले लगभग दो सालों से भारत की व्हाइट-बॉल टीम का हिस्सा नहीं रहे हैं।
पिछले साल रेड-बॉल क्रिकेट में उनका प्रदर्शन खास तौर पर शानदार रहा था जिसमे सात टेस्ट मैचों में 48.38 की औसत से 629 रन बनाए, जिसमें दो शतक और चार अर्धशतक शामिल थे। फिर भी, यह सब उनकी उप-कप्तानी बनाए रखने के लिए काफी नहीं था।
हेड कोच गौतम गंभीर ने यह कहा
गंभीर ने कहा, “हम नहीं चाहते कि ऋषभ पंत बदलें, लेकिन इंटरनेशनल क्रिकेट में खिलाड़ियों से मैच की सिचुएशन को सम्मान करने की उम्मीद की जाती है।”
जब पंत अच्छा खेलते हैं, तो वे विरोधी टीम के बॉलर्स पर हावी हो जाते हैं और बहुत कम समय में मैच का रुख बदल देते हैं। उनकी जबरदस्त बल्लेबाजी ने विरोधी टीमों के कप्तानों की नींद जरूर उड़ाई है। हालांकि, ऐसे भी मौके आए हैं जब पंत अजीबोगरीब तरीके से आउट भी हुए हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि पंत अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट में कैसा खेलते हैं, जो शनिवार, 6 जून को मुल्लांपुर के महाराजा यादवेंद्र सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में शुरू होगा।
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