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33 की उम्र में सरांश जैन का सपना हुआ पूरा, पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में मिली जगह

33 की उम्र में सरांश जैन का सपना हुआ पूरा, पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में मिली जगह

Saransh and Kartikeya (Image credit Twitter – X)

मध्य प्रदेश के ऑफ स्पिन ऑलराउंडर सरांश जैन ने आखिरकार अपने लंबे इंतजार को खत्म करते हुए भारतीय टेस्ट टीम में जगह बना ली है। 33 वर्षीय सरांश को श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया है।

उन्हें यह मौका वॉशिंगटन सुंदर के हैमस्ट्रिंग चोट के कारण बाहर होने के बाद मिला। हालांकि, सरांश का कहना है कि उन्हें हमेशा भरोसा था कि एक दिन वह भारत के लिए जरूर खेलेंगे। उनके मुताबिक, उम्र सिर्फ एक आंकड़ा है और अगर मेहनत जारी रहे तो सफलता जरूर मिलती है।

सरांश जैन पिछले कई वर्षों से घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे। हाल ही में सेंट्रल जोन को दलीप ट्रॉफी जिताने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने 136 रन बनाए और 16 विकेट लेकर प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बने।

दलीप ट्रॉफी फाइनल में उन्होंने पहली पारी में शानदार शतक लगाया और आठ विकेट लेकर अपनी टीम को खिताब दिलाने में बड़ा योगदान दिया। यही प्रदर्शन उनके भारतीय टीम तक पहुंचने की सबसे बड़ी वजह बना।

सरांश ने बताया कि 2014-15 रणजी ट्रॉफी सीजन में तमिलनाडु के खिलाफ अपने पहले ही मैच में उन्होंने पांच विकेट लिए थे। उस मुकाबले में दिनेश कार्तिक जैसे अनुभवी खिलाड़ी भी सामने थे।

उस प्रदर्शन के बाद उन्हें विश्वास हो गया कि अगर मेहनत और अनुशासन बनाए रखा जाए तो अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना संभव है। उन्होंने हमेशा उन्हीं चीजों पर ध्यान दिया जो उनके नियंत्रण में थीं।

हरभजन सिंह की सलाह बनी प्रेरणा

सरांश ने पूर्व भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के एक कैंप के दौरान हरभजन ने उन्हें एक ऐसी सलाह दी, जिसे उन्होंने हमेशा याद रखा। हरभजन ने कहा था कि कुछ हासिल करने के लिए कुछ खोने की जरूरत नहीं, बल्कि लगातार मेहनत करनी होती है।

सरांश का कहना है कि यही बात उन्हें हर दिन बेहतर बनने के लिए प्रेरित करती रही। सरांश ने अपनी इस उपलब्धि का सबसे बड़ा श्रेय अपने परिवार और पिता सुभाष जैन को दिया, जो खुद भी ऑफ स्पिनर रह चुके हैं।

उन्होंने कहा कि क्रिकेट खेलने की प्रेरणा उन्हें अपने पिता से मिली और वही उनके सबसे बड़े आदर्श हैं। मुश्किल समय में परिवार हमेशा उनके साथ खड़ा रहा। सरांश का मानना है कि परिवार के सहयोग और लगातार मेहनत की बदौलत ही आज उनका भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने का सपना पूरा हुआ।

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