

भारतीय क्रिकेट में कई ऐसे खिलाड़ी रहे हैं, जिन्होंने लंबे समय तक शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन उन्हें उतनी चर्चा नहीं मिली, जितनी उनके रिकॉर्ड बताते हैं। रवींद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) भी ऐसे ही खिलाड़ियों में शामिल हैं। 37 साल की उम्र में भी जडेजा टेस्ट क्रिकेट में बल्ले, गेंद और फील्डिंग तीनों विभागों में लगातार योगदान दे रहे हैं।
जडेजा ने 2009 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था और 2012 में इंग्लैंड के खिलाफ अपना टेस्ट डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने अपने प्रदर्शन से भारतीय टेस्ट टीम में एक मजबूत जगह बनाई। उनके करियर को देखें तो यह साफ होता है कि वह सिर्फ एक गेंदबाज या बल्लेबाज नहीं, बल्कि एक शानदार ऑलराउंडर हैं। आइए उनके करियर की उन 3 बड़ी वजहों को जानें:
1. टेस्ट क्रिकेट में शानदार ऑलराउंड रिकॉर्ड
श्रीलंका के खिलाफ गॉल टेस्ट से पहले जडेजा ने 89 टेस्ट मैचों में 4,095 रन बनाए थे। उनका बल्लेबाजी औसत करीब 38 का रहा और उनके नाम 175* रन की सर्वश्रेष्ठ पारी भी दर्ज है। गेंदबाजी में वह 348 विकेट हासिल कर चुके थे। श्रीलंका की पहली पारी में उन्होंने 350 टेस्ट विकेट का आंकड़ा भी पार कर लिया।
जडेजा टेस्ट क्रिकेट में 4,000 से ज्यादा रन और 350 से ज्यादा विकेट लेने वाले दुनिया के सिर्फ चौथे खिलाड़ी हैं। इससे पहले वह 2,500 रन और 250 विकेट का डबल सबसे तेजी से पूरा करने वाले खिलाड़ी भी बने थे।
2019 में जडेजा 200 टेस्ट विकेट लेने वाले सबसे तेज बाएं हाथ के गेंदबाज बने थे। वहीं, 2025 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के दौरान वह वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के दौर में 2,000 रन और 100 विकेट पूरे करने वाले पहले क्रिकेटर बने।
2. 2025 में बल्ले से दिखाया शानदार प्रदर्शन
2025 में इंग्लैंड के खिलाफ एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी में जडेजा ने बल्ले से भी कमाल किया। उन्होंने पूरी सीरीज में 516 रन बनाए और छह बार 50 या उससे ज्यादा रन की पारी खेली।
इस दौरान उन्होंने लगातार पांच अर्धशतक लगाए और मैनचेस्टर टेस्ट में शानदार शतक भी जड़ा। वह इंग्लैंड में एक टेस्ट सीरीज के दौरान नंबर-6 या उससे नीचे बल्लेबाजी करते हुए छह 50+ स्कोर बनाने वाले पहले बल्लेबाज बने। उन्होंने 1966 में सर गैरीफील्ड सोबर्स के बनाए रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा। साथ ही जडेजा इस सीरीज में 500 से ज्यादा रन बनाने वाले पहले भारतीय भी बने, जब उन्होंने पूरी सीरीज में नंबर-6 या उससे नीचे बल्लेबाजी की।
3. 37 साल की उम्र में भी शानदार फील्डिंग
जडेजा की सबसे बड़ी ताकतों में उनकी फील्डिंग भी शामिल है। उन्हें अपनी पीढ़ी के बेहतरीन फील्डरों में गिना जाता है। वह मैदान के अंदर और बाउंड्री के पास दोनों जगह शानदार फील्डिंग कर सकते हैं।
टेस्ट क्रिकेट में पांच दिन तक लगातार मैदान पर रहना आसान नहीं होता। इसके बावजूद 37 साल की उम्र में जडेजा अपनी फील्डिंग का स्तर बनाए हुए हैं। उनकी तेज प्रतिक्रिया और सटीक थ्रो कई बार मैच का रुख बदल चुके हैं।
जडेजा की खासियत यह है कि वह किसी एक विभाग पर निर्भर नहीं रहते। बल्ले से रन, गेंद से विकेट और मैदान में शानदार कैच या रन आउट—वह तीनों क्षेत्रों में टीम के लिए योगदान देने की क्षमता रखते हैं।
रवींद्र जडेजा का करियर बताता है कि उन्होंने भारतीय क्रिकेट को लंबे समय तक लगातार अपनी सेवाएं दी हैं। उनके रिकॉर्ड, बल्लेबाजी में सुधार, गेंदबाजी की निरंतरता और बेहतरीन फील्डिंग को देखते हुए उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रभावशाली ऑलराउंडरों में गिना जाना चाहिए।
उनकी उपलब्धियां शायद हमेशा सुर्खियों में नहीं रहतीं, लेकिन आंकड़े और मैदान पर उनका प्रदर्शन इस बात की गवाही देते हैं कि जडेजा भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद और पूर्ण ऑलराउंडरों में से एक हैं
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