

आईपीएल 2027 से पहले हार्दिक पांड्या को लेकर ट्रेड की खबरें लगातार चर्चा में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंबई इंडियंस अपने कप्तान हार्दिक पांड्या को दूसरी फ्रेंचाइजी के साथ ट्रेड करने पर विचार कर रही है। इस बीच भारत के अनुभवी स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने इस पूरे मामले पर अपनी राय रखते हुए मुंबई इंडियंस को अहम सलाह दी है।
अश्विन ने सुझाया खास ट्रेड फॉर्मूला
अपने यूट्यूब चैनल पर बात करते हुए अश्विन ने कहा कि अगर कोलकाता नाइट राइडर्स हार्दिक पांड्या को अपनी टीम में शामिल करना चाहती है, तो मुंबई इंडियंस को बदले में सिर्फ कैमरून ग्रीन लेने के बजाय दो भारतीय खिलाड़ियों की मांग करनी चाहिए। उनके अनुसार हर्षित राणा और रिंकू सिंह ऐसे खिलाड़ी हैं, जिनके आने से मुंबई की टीम और मजबूत हो सकती है।
अश्विन ने यह भी कहा कि अगर वह मुंबई इंडियंस की जगह होते तो इसी शर्त पर ट्रेड के लिए तैयार होते। उनका मानना है कि केवल ऐसे खिलाड़ियों को लेने से ही टीम का भविष्य मजबूत होगा।
सीएसके और केकेआर दोनों से जुड़ रही हैं अटकलें
रिपोर्ट्स के अनुसार, चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स दोनों ही हार्दिक पांड्या को अपनी टीम में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं। चर्चा है कि चेन्नई, शिवम दुबे और एक भारतीय तेज गेंदबाज को ट्रेड का हिस्सा बना सकती है, जबकि केकेआर की ओर से कैमरून ग्रीन का नाम सामने आया है।
हालांकि, अश्विन ने सवाल उठाया कि अगर कैमरून ग्रीन अगले साल एशेज सीरीज की तैयारी पर ध्यान देते हैं, तो मुंबई इंडियंस को इससे ज्यादा फायदा नहीं मिलेगा। अश्विन का मानना है कि अगर हार्दिक पांड्या केकेआर में शामिल हो जाते हैं, तो उनकी बल्लेबाजी बेहद मजबूत हो जाएगी। इससे कोलकाता खिताब की सबसे बड़ी दावेदार टीमों में शामिल हो सकती है।
ऐसे में मुंबई इंडियंस को सिर्फ ट्रेड नहीं, बल्कि यह भी सोचना होगा कि इस फैसले से कौन-सी टीम सबसे ज्यादा मजबूत होगी। उनके मुताबिक सही खिलाड़ियों के बदले ही हार्दिक को छोड़ना मुंबई के लिए समझदारी होगी।
3 श्रीलंकाई खिलाड़ी जो भारत के लिए मुश्किल पैदा कर सकते हैं
अजिंक्य रहाणे की यूरोपीय T20 प्रीमियर लीग में एंट्री, एम्स्टर्डम फ्लेम्स के साथ की डील
दलीप ट्रॉफी 2026 से पहले रेड-बॉल क्रिकेट पर वैभव सूर्यवंशी का ध्यान, राजस्थान रॉयल्स अकादमी में कर रहे हैं खास तैयारी
‘फोटोशॉप का सहारा लेकर बनाई फेक स्टोरी’ – इरफान पठान ने खोली पाकिस्तानी मीडिया के झूठे दावे की पोल

